शरीर से बाहर निकलकर दुनियां में कैसे घूमें | Astral Travel in Hindi 

क्या आपने कभी सोचा है कि शरीर से बाहर निकलने का अनुभव कैसा होता है| हालाँकि सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है | क्योकि यह अक्सर आपने फिल्मों में देखा है | लेकिन यह रियल लाइफ में भी हो सकता है हालाँकि वैसे नहीं जैसे आप सोच रहें हों| आपको बता दें कि इस प्रक्रम को Astral projection या astral travel के नाम से भी जाना जाता है | प्रस्तुत लेख में हमने शरीर से खुद को बाहर निकालने के लिए एक विधि का वर्णन किया है| हालाँकि विधि थोड़ी बड़ी है लेकिन आपके लिए प्रभावी भी हो सकती है | आप इसका उपयोग कर सकते हैं एवं भौतिक शरीर से खुद को अलग करने का अनुभव भी प्राप्त कर सकते हैं |

शरीर से बाहर निकलकर दुनियां में कैसे घूमें | Astral Travel in Hindi 
शरीर से बाहर निकलकर दुनियां में कैसे घूमें | Astral Travel in Hindi 

शरीर से बाहर निकलकर दुनियां में कैसे घूमें

सबसे पहले एक अच्छी जगह ढूढें जहाँ पर आपको कोई डिस्टर्ब न कर सके-

आप एक शांत जगह का चुनाव कर सकते हैं जहाँ पर आपको कोई बाधित न करे | अगर आप जगह ढूँढने में असफल महसूस कर रहे हैं तो आप किसी विशेष समय का चुनाव करें | एक ऐसा समय जिसमें आपको किसी के द्वारा डिस्टर्ब करने की सम्भावना बहुत कम हो या बिलकुल भी न हो| आप चाहें तो सुबह 4 बजे से 6 बजे तक का समय चुन सकते हैं|   

एक आरामदायक स्थिति में बैठ जाएँ-

ध्यान रहे अब आपको एक ऐसी स्थिति का चयन करना है जिसमें आपके शरीर को पीड़ा महसूस न हो | अर्थात एक ऐसी स्थिति का चयन करें जो आरामदायक हो | क्योकि अगर आप किसी भी पीड़ा वाली स्थिति का चयन करते हैं| तो आपके कमरे में किसी भी डरावना आकार या यूँ कहें कि कोई भूत या जिससे आपको डर लगता है प्रवेश कर सकता है| हालाँकि अगर आप यह सोचते रहेंगे कि यह सब मेरे मन के द्वारा सोचा जा रहा है तो आप ऐसे किसी भी डरावने आकार का सामना कर लेंगे| लेकिन अगर नहीं कर पाए तो यह आपके लिए थोड़ा खतरनाक हो सकता है|      

खुद से कहें कि अब आप शरीर से बाहर होने जा रहे हैं-

अब आपको खुद से कहना है कि मैं अपने शरीर से बाहर होने जा रहा हूँ हालांकि यह आपको साहस पूर्वक कहना है| इसी बात को बार-बार कहें | एवं तब तक कहते रहें जब तक आपके मनमस्तिष्क में यही बात न गूंजने लगे | 

आंखों को बंद करें एवं बाहरी परिवेश पर ध्यान न दें-

अब आपको अपनी आंखें बंद करनी है एवं बाहरी परिवेश पर ध्यान नहीं देना है | इसके लिए आप ध्यान की विधियों का भी उपयोग कर सकते हैं| 

खुद को सोने के करीब पहुँचायें-

अब आप खुद को लगभग सोने की अनुमति दें लेकिन ध्यान रहे कि आपको सोना नहीं है| 

अब बढ़ते हैं उस कदम की ओर जिसके लिए आप इस लेख को पढ़ रहे हैं- 

शरीर में कम्पन्न महसूस करने की कोसिस करें-

अब आपको अपने आसपास की अपेक्षा शरीर में क्या हो रहा इस पर ध्यान केंद्रित करना है | एवं आपको अपने शरीर में एक कम्पन महसूस करना है| इस कम्पन के कारन आपको महसूस होने लगेगा कि आप खुद को अपने भौतिक शरीर से अलग करने जा रहे हैं | हालाँकि अगर आप इसे पहली बार कर रहे हैं तो थोड़ा अजीब एवं डरावना महसूस हो सकता है | लेकिन इसके साथ बने रहें | 

कम्पन्न को कम करने की कोसिस करें- 

अब आपको अपने शरीर में उत्पन्न कम्पन्न को कम करने का प्रयास करना है अर्थात उसे नियंत्रित करने का प्रयास करना है| इसके लिए आपको बता दें कि जिस प्रकार से आपने कम्पन्न को उत्पन्न किया वैसे ही आप इसे नियंत्रित करें | कम्पन्न को नियंत्रित करने के बाद अब बढ़ते हैं आगे के स्टेप की ओर|

रस्सी की कल्पना करना- 

अब आपको इस प्रकार से सोचना है कि आपके ऊपर एक रस्सी लटकी हुई है | अब अपने वास्तविक शरीर को हिलाये बिना आपको कल्पना करनी है कि आप अपने किसी एक हाथ को उस रस्सी की ओर ले जा रहे हैं | और अब आपने रस्सी पकड़ ली है | इसके बाद काल्पनिक रूप से अपने हाथ को भौतिक शरीर में वापस ले आयें| इसके बाद यही प्रक्रिया अपने दूसरे हाथ से भी करें | इसके बाद दूसरे स्टेप की ओर बढ़ें|

खुद को पूरी तरह से अपने शरीर से अलग करें-

अब आपको अपने दोनों हाथों को काल्पनिक रूप से धीरे-धीरे रस्सी की ओर ले जाना है | और ऐसा महसूस करना है कि आप रस्सी को पकड़कर अपने शरीर को खींच रहें हैं| हालाँकि यह करते समय आप अपने शरीर की मांसपेशियों में थोड़ा खिंचाव महसूस कर सकते हैं | लेकिन आपको घबराना नहीं है | और रस्सी पर चढ़ने पर ध्यान केंद्रित करें | इस प्रकार से आप पाएंगे कि आपने खुद को अपने भौतिक शरीर से अलग कर लिया है |  

अनुसंशाएँ एवं चेतावनीयाँ – 

  • यात्रा करते समय घबरायें नहीं अन्यथा आपको प्रतिकूल परिणाम मिल सकते हैं |
  • आप इसमे बहुत जल्दी पूर्ण नहीं हो सकते हैं इसमें धैर्य की आवश्यकता होती है | कुछ लोग क्लास भी लेते हैं | 
  • अगर आप यात्रा करते समय वापस अपने शरीर में आना चाहते हैं तो आपको केवल इस बारे में सोचने की जरूरत होगी | 

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स्त्रोत- 

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