नववर्ष 1 जनवरी को क्यों मनाया जाता है | Happy New Year 2023 in Hindi 

Happy New Year: क्या आप जानते हैं कि नववर्ष 1 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है? यह किसी दूसरे महीने में क्यों नहीं मनाया जाता है | हालाँकि इसके ऊपर एक कहानी है जिसे आप इस लेख में पढ़ सकते हैं | एवं भारत में एक साल में नयी साल की खुशी कितनी बार आती है? इस बारे में भी हमने इस लेख में विस्तृत रूप से बताया है| लेकिन उससे पहले आपको बता दें कि नए साल का जश्न लोग किस प्रकार से मनाते हैं- 

नववर्ष 1 जनवरी को क्यों मनाया जाता है
नववर्ष 1 जनवरी को क्यों मनाया जाता है

Happy New Year in Hindi 

नया साल अर्थात 1 जनवरी का हर कोई बेसब्री से इंतजार करता है | नया साल हर किसी के लिए खुशी लेकर आता है | बड़े-बड़े लोग सलाह देते हैं कि हमें बीते हुए समय से सबक लेते हुए आगे आने वाले समय पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए |   

बहुत से लोग नयी साल पर वाहन खरीदते हैं क्योकि वाहन कम्पनियाँ नयी साल पर बहुत छूट देती हैं| जिसके चलते नयी साल पर वाहन शोरूमों में जमकर भीड़ देखने को मिलती है | 

इसके अलावा कुछ लोग नए साल पर अपना नया बिज़नेस शुरू करते हैं| क्योकि वह नए साल को अपने बिज़नेस के लिए शुभ मानते हैं |     

नयी साल पर घरों की सजावट भी देखने को मिलती है | लोग अपने घरों को सजाने के लिए कृत्रिम लाइट वल्बों का उपयोग करते हैं ताकि उनका घर रात को भव्य दिख सके | तो कुछ लोग नयी साल पर अपने घरों को शानदार रंगों से पोतना पसंद करते हैं |  

तो वहीं कुछ लोग नयी साल पर पार्टियों का आयोजन करते हैं एवं पार्टियों में शामिल होने के लिए अपने परिजनों को भी आमंत्रित करते हैं | 

इसके अलावा कुछ लोग अपने दोस्तों को नए साल की शुभकामनाएँ ग्रीटिंग कार्ड के जरिये देते हैं | हालाँकि इस तरीके से लोग धीरे-धीरे दूर होते जा रहे हैं| क्योकि वर्तमान समय में लोग सोशल मीडिया पर अधिक सक्रीय रहते हैं | इस कारन से लोग एक दूसरे को नया साल मुबारक हो कहने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेने लगे हैं| 

बहुत से लोग तो नए साल को इस तरीके से मनाते हैं जैसे किसी का बर्थडे मनाया जा रहा हो | वहीं कुछ लोग नयी साल पर अपनी पुरानी गलतियों को न दोहराने का संकल्प लेते हैं | साथ ही आपको बता दें कि नयी साल के दिन इंटरनेट पर शायरियों को सर्च करने वालों की संख्या भी काफी बढ़ जाती है | क्योकि लोग एक दूसरे को नयी साल मुबारक हो कहने के लिए शायरियों का उपयोग करना पसंद करते हैं|     

नया साल 1 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है? 

यह प्रश्न आपके मनमस्तिष्क में जरूर आया होगा कि लोग नया साल 1 जनवरी को ही क्यों मनाते हैं? तो आपको बता देते दें कि इसके पीछे एक कहानी है | 

कहानी कुछ इस प्रकार से है कि नया साल पहले 1 जनवरी को नहीं मनाया जाता था | बल्कि पहले 25 मार्च को तो कभी 25 दिसंबर को मनाया जाता था | लेकिन रोम के राजा नूमा पोंपिलस ने रोमन कैलेंडर में आंशिक रूप से सुधार कर दिया | लेकिन फिर भी जनवरी साल का पहला महीना नहीं था | इसके बाद रोमन जनरल एवं राजनेता जूलियस सीजर ने कैलेंडर में सुधार किया एवं 1 जनवरी को नयी साल की शुरुआत के रूप में माना जाने लगा | इस कैलेंडर को जूलियन कैलेंडर कहा जाता है |

लेकिन इस कैलेंडर में लीप वर्ष की गलती निकली | इस गलती को पोप ग्रेगरी XIII ने सुधारा एवं एक नया कैलेंडर पेश किया | इसी कैलेंडर का उपयोग वर्तमान समय में किया जाता है जिसे आज हम ग्रेगोरियन कैलेंडर के नाम से जानते हैं | आपको बता दें कि इस कैलेंडर को ईसाई देशों ने सबसे पहले अपनाया | लेकिन धीरे-धीरे गैर ईसाई देशों ने भी इसे अपनाना शुरू कर दिया | तो यह था ईसाई नववर्ष | 

अब बढ़ते हैं भारत में मनाये जाने वाले नववर्षों की ओर | जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में सभी धर्मों के लोग रहते हैं | इस कारन से भारत में नए साल की खुशी एक साल में पांच बार आती है| लेकिन आपको बता दें कि सर्वाधिक रूप से नया साल 1 जनवरी को ही मनाया जाता है जो एक ईसाई नववर्ष है | चूंकि हम ईसाई नववर्ष के बारे में तो पहले ही बात कर चुके हैं तो अब बचे हुए चार नववर्ष के बारे में जानें- 

हिन्दू नववर्ष या नव संवत्सर  

इसे नव संवत्सर या गुड़ी पड़वा के नाम से जाना जाता है| हिन्दू-नववर्ष का प्रारम्भ चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है | अर्थात अप्रैल के महीने से नव संवत्सर का आरम्भ माना जाता है|  

हिंदू नववर्ष क्यों मनाया जाता है?

माना जाता है कि चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा को ही भगवान ब्रम्हा ने सृष्टि का सृजन करना शुरू कर दिया था | इस कारन से नववर्ष की शुरुआत इसी दिन से मानी जाती है| 

जैन नववर्ष या वीर निर्वाण संवत  

यह नववर्ष दीपावली के अगले दिन से शुरू होता है | जैनियों द्वारा धूमधाम से मनाया जाने वाला यह नववर्ष वीर निर्वाण संवत के नाम से भी जाना जाता है|

पंजाबी नववर्ष 

होली के दूसरे दिन से यह नववर्ष शुरू होता है | पंजाबी नववर्ष पंजाबियों द्वारा बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है | 

पारसी नववर्ष या नवरोज  

इस नववर्ष की शुरुआत 3000 वर्ष पहले शाह जमशेद जी ने की थी| इसे नवरोज के नाम से भी जाना जाता है| यह नववर्ष 19 अगस्त से शुरू होता है|     

अंतिम विचार

कुछ लोगों को नए साल के दिन आतिशबाज़ी करते हुए भी देखा जाता है | लेकिन इससे ध्वनि प्रदुषण एवं वायु प्रदुषण होता है| इस कारन से नयी साल मनाने का यह सही तरीका नहीं है | 

इसके अलावा कुछ लोग सलाह देते हैं कि अगर नयी साल का पहला दिन शुभ हो तो साल के सभी दिन शुभ हो जाते हैं | लेकिन यह एक किवंदन्ती है | आपको बता दें कि साल का प्रत्येक दिन आपके लिए अच्छा एवं शुभ है | लेकिन यह सब कुछ आप पर निर्भर करता है | 

यह भी पढ़ें- मोची एवं कल्पित बोनों की कहानी

नया साल के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न-

  • हम नया साल कैसे मना सकते हैं?

    नया साल आप अपने घर में अच्छी तरह से सजावट करके, अच्छे-अच्छे पकवान बनाकर एवं लोगों से गले मिलकर मना सकते हैं | इसके अलावा आप नए साल के दिन अपनी पुरानी गलतियों को दोबारा से न दोहराने के संकल्प भी ले सकते हैं |

  • नया साल कितने बजे शुरू होता है?

    नया साल 31 दिसंबर की रात के 12 बजे के बाद शुरू हो जाता है |  

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