Birthday Special शिखर धवन से जुडी ऐसी बाते जो शायद आप नहीं जानते होंगे

भारतीय टीम के बेहद खास और विस्फोटक बल्लेबाज शिखर धवन को कौन नहीं जानता। गब्बर के नाम से मशहूर शिखर धवन अपने आक्रमक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। आज हम इस पोस्ट में आपको शिखर धवन के बारे में ऐसी बातें बताएंगे जो शायद आप नहीं जानते होंगे।शिखर धवन का जन्म 5 दिसंबर 1985 को दिल्ली के पंजाबी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम महेंद्र पाल धवन और माता का नाम सुनैना धवन है। शिखर धवन ने अपनी स्कूली पढ़ाई सेंट मार्क सीनियर सैकेंडरी पब्लिक स्कूल से की है। शिखर बचपन से ही बहुत शरारती थे और उनको खेलने का बहुत शौक था। 

शिखर धवन ने एक चैट शो के दौरान बताया कि बचपन में वह बहुत शरारती थे और इन्हीं शरारतो के कारण उनकी मां उन्हें रोज रूम में लॉक करके बाहर जाया करती थी। तो शिखर खिड़की से कपड़ों के सहारे लटक कर बाहर निकल जाते थे और फिर से खेलने चले जाते थे। शिखर धवन को बचपन से ही क्रिकेट में काफी रुचि थी। इन्होंने महज 12 वर्ष की उम्र में ही  क्रिकेट क्लब ज्वाइन कर लिया था।  जहां इनके कोच तारक सिंहा थे।

शुरुआत में शिखर अपने क्लब के लिए विकेटकीपर की भूमिका में होते थे। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी बल्लेबाजी कौशल को निखारना शुरू किया और आगे चलकर वे पूर्ण रूप से बल्लेबाज के रूप में सामने आए। धीरे-धीरे शिखर धवन अपनी अच्छी परफॉर्मेंस से सबको प्रभावित करने लगे। जिसके बाद धवन को 1999 में विजय मर्चेंट ट्रॉफी अंडर 16 टीम में दिल्ली की तरफ से खेलने का मौका मिला। लेकिन इस सीजन में धवन का प्रदर्शन सामान्य रहा। लेकिन अगले सीजन में विजय मर्चेंट ट्रॉफी में शिखर का प्रदर्शन शानदार रहा।

इस पूरे टूर्नामेंट में शिखर ने 9 मैचों में 83.88 की औसत से 755 रन बनाए। शिखर इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे और उनकी टीम दिल्ली इस टूर्नामेंट में दूसरे स्थान पर रही। शिखर धवन के अच्छे प्रदर्शन के कारण उन्हें अंडर-17 एशिया कप के लिए सेलेक्ट किया गया। 2001 में कूच विहार ट्रॉफी के लिए दिल्ली अंडर-19 टीम में शिखर का चयन हुआ। तब शिखर महज 15 साल के थे।  2002 में विजय हजारे ट्रॉफी में शिखर धवन का बेहतरीन फॉर्म जारी रहा। जहां उन्होंने 282 रन बनाए।

शिखर धवन सबसे ज्यादा सुर्खियों में तब आए। जब 2004 में अंडर-19 विश्व कप में शिखर धवन ने सबसे अधिक रन बनाए। उन्होंने 7 पारियों में 505 रन बनाए। जिसके लिए शिखर को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का अवार्ड भी दिया गया. जिसके बाद धवन ने 2005 में रणजी सीजन में फर्स्ट क्लास क्रिकेट की शुरुआत की। धवन उस समय रणजी सीजन में दिल्ली के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे। 2008 में रणजी सीजन में दिल्ली को चैंपियन बनाने में शिखर का बहुत बड़ा योगदान था।  जिसके बाद आईपीएल 2008 में दिल्ली डेयरडेविल्स की टीम ने धवन को खरीदा था।

शिखर धवन के अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत 

घरेलू क्रिकेट से निकलकर शिखर धवन ने 2010 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत की। 2010 में उन्हें पहली बार वनडे टीम में खेलने का मौका मिला। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस मैच में धवन दूसरी गेंद पर ही बिना खाता खोले आउट हो गए  थे। इस खराब प्रदर्शन के कारण उन्हें अगले सीजन में सेलेक्ट नहीं किया गया। 2011 में शिखर को फिर से टीम में खेलने का मौका मिला। लेकिन वह लगातार दूसरी बार भी असफल रहे। 2011 में वेस्टइंडीज टीम के खिलाफ एक मैच में धवन ने अच्छी बल्लेबाजी की और फिर तीन मैचों में सिर्फ 18 रन ही बना सके। अच्छा प्रदर्शन न कर पाने की वजह से उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया।

जब शिखर धवन ने क्रिकेट छोड़ने का मन बनाया 

धवन के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफलता अभी बहुत दूर थी। इसी बीच उनके मन में असफलता के कारण कई ख्याल आने लगे।  यहां तक कि उन्होंने क्रिकेट को छोड़ने का भी मन बना लिया था। शिखर धवन के कोच तारक सिन्हा ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि शिखर  एक वक्त क्रिकेट छोड़ने का मन बना लिया था। क्योंकि वह नियमित रूप से टीम में अपनी जगह नहीं बना पा रहे थे। ऐसा इसलिए था क्योंकि उस वक्त वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर जैसे दिग्गज बल्लेबाज टीम में मौजूद थे और इन दिग्गजों के चलते धवन को बाहर बैठना पड़ता था। जिससे वह निराश हो गए थे। उनके कोच ने  बताया कि उन्हें यह समझाना थोड़ा मुश्किल था कि वह निराश ना हो कि और क्रिकेट खेलते रहे।

टीम से बाहर होने के बाद धवन ने पिछली गलतियों से काफी कुछ सीखा और अपनी बल्लेबाजी को निखारने के लिए कड़ी मेहनत करने लगे। जिसके बाद धवन ने 2012 में घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन किया। जिसके बाद चयनकर्ताओं ने शिखर धवन को फिर से मौका दिया। जहां उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच की सीरीज के लिए चुना गया। 14 मार्च 2013 को शिखर ने अपना पहला टेस्ट मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला। जहां उन्होंने 50 गेंदों पर शतक जड़ दिया और 187 रनों की शानदार पारी खेली। इस तरह से शिखर ने अपने डेब्यू टेस्ट मैच के शुरुआत काफी शानदार तरीके से की।

इस बेहतरीन प्रदर्शन के के कारण उन्हें 2014 में आईसीसी चैंपियन ट्रॉफी के लिए चुना गया. जहां उन्होंने अपना शानदार फॉर्म जारी रखा। उन्होंने 5 मैचों में 363 रन बनाए। जिसके लिए उन्हें आईसीसी चैंपियन ट्रॉफी में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का भी खिताब मिला। खास बात यह है कि आईसीसी चैंपियन ट्रॉफी 2013 में शिखर धवन ने सबसे अधिक रन बनाए थे और उन्हें गोल्डन बैट अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था। उन्होंने अपने इस अवार्ड को उत्तराखंड में आई भीषण बाढ़ में जान गवाने वाले लोगों को समर्पित कर दिया था। धवन ने मैच के बाद कहा कि यह पुरस्कार में उन लोगों को समर्पित करना चाहता हूं जिन्होंने बाढ़ में अपनी जान गवा दी है और मैं उनके लिए प्रार्थना करता हूं।

शिखर धवन का दूसरा नाम गब्बर है और उन्हें कर दो गब्बर नाम इसलिए दिया गया। क्योंकि जब  वे स्लिप में फील्डिंग करते थे तो टीम का उत्साह बढ़ाने के लिए वे शोले फिल्म के मशहूर खलनायक अमजद खान के डायलॉग बोला करते थे। इसलिए सब उन्हें गब्बर के नाम से बुलाने लगे।

शिखर धवन की लव स्टोरी

शिखर धवन की लव स्टोरी भी किसी बॉलीवुड लव स्टोरी से कम नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपने हमसफर की तलाश की। एक दिन धवन अपने साथी खिलाड़ी हरभजन की सिंह के साथ फेसबुक चला रहे थे। तभी धवन की नजर एक प्रोफाइल पर टिक गई है यह कोई और नहीं आयशा मुखर्जी थी। शिखर ने आयशा को हरभजन सिंह के फेसबुक फ्रेंड लिस्ट में देखा था और धवन ने तुरंत आयशा को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी और आयशा ने भी उसे  स्वीकार कर लिया और फिर धवन और आयशा एक दूसरे को चाहने लगे। इसके बाद 2018 में धवन और आयशा शादी के बंधन में बंध गए। आयशा की यह दूसरी शादी थी इससे पहले आयशा ने ऑस्ट्रेलिया के एक बिजनेसमैन से शादी की थी। लेकिन बाद में दोनों का तलाक हो गया था। आयशा की पहली शादी से उनकी दो बेटियां हैं जिनका राम नाम रिया और आलिया है। शिखर और आयशा का एक बेटा भी है जिसका नाम जोरावर है. सबसे खास बात यह है कि शिखर अपनी बेटियों से भी उतना ही प्यार करते हैं। जितना कि अपने बेटे से करते है।

शिखर धवन कैच पकड़ने के बाद या फिर शतक बनाने के बाद अलग ही स्टाइल में तक बनाते हैं। वह ऐसा स्टाइलिश लिए दिखाते हैं दरअसल इसके पीछे भी एक राज है। शिखर ने एक शो के दौरान बताया कि उन्हें कबड्डी बेहद पसंद है। कबड्डी में जब कोई खिलाड़ी अंक हासिल करता है। तो वह अपना दम दिखाने के लिए अपनी जांघ पर ताल जरूरत देता है। वही शिखर को बहुत पसंद आता है और उन्होंने क्रिकेट में इस तरह का जश्न मनाना शुरू कर दिया। शिखर धवन ने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। शिखर  इकलौते ऐसे प्लेयर है। जिनको आईसीसी चैंपियन ट्रॉफी टूर्नामेंट में लगातार दो बार गोल्डन बैट मिला है।

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