omega-3 क्या होता है omega-3 हमारे शरीर के लिए जरूरी क्यों है

ओमेगा-3 फैटी एसिड दोस्तों पहले भी आपने इसका नाम सुना होगा। ओमेगा-3 बढे हुए पिंपल्स जोड़ों का दर्द और दिमागी कमजोरी को दूर करने के साथ-साथ शरीर में बढ़े हुए इन्फ्लेमेशन और आंखों की अच्छी सेहत के लिए बहुत जरूरी होता है। यहां तक की है वजन को मेंटेन रखने में बहुत मदद करता है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि आजकल खाने पीने के सही तरीके की जानकारी ना होने की वजह से  अक्सर लोगों  के शरीर में होगा ओमेगा-3 की कमी पाई जाती है। क्योंकि ज्यादातर लोगों को यह पता ही नहीं होता है कि omega-3 होता क्या हैओमेगा-3 की कमी को किस तरह से पूरा किया जा सकता है। इसलिए आज की इस पोस्ट में हम ओमेगा 3 के बारे में बताएँगे। ओमेगा-3 क्या होता है ? ओमेगा-3 की कमी को किस तरह से पूरा किया जा सकता है। मेगा-3 हमारे शरीर के लिए जरूरी क्यों हैओमेगा-3 की कमी को किस-किस खाने के जरिए पूरा किया जा सकता है

उन्हें का तरीका कब और किस तरह से इस्तेमाल करना चाहिए। वेजिटेरियन और नॉन वेजिटेरियन कौन से किस खाने में सबसे अच्छा ओमेगा-3 पाया जाता है। एक दिन में हमें कम से कम और ज्यादा से ज्यादा कितना ओमेगा-3 लेना चाहिएक्या ज्यादा omega-3 लेने से कोई नुकसान भी हो सकता है

ओमेगा-3 क्या होता है 

ओमेगा 3 क्या होता है और यह हमारे शरीर के लिए यह हमारे शरीर के लिए इतना जरूरी क्यों है। दोस्तों जो हम खाना खाते हैं। उसमें तीन तरह के मैक्रोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। प्रोटीन,फैट और कार्बोहाइड्रेट। लेकिन इनमें भी जो फैट होता है। वह भी तीन तरह के होते हैं। सैचुरेटेड फैट्स , पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स और मोनोअनसैचुरेटेड फैट और इनमें से जो यह पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स होता है। यह यही टूटने के बाद ओमेगा-3 और ओमेगा-6  में बदलता है। वैसे तो ओमेगा-3 और ओमेगा-6  दोनों ही हमारे दिमाग को ठीक तरह से काम करने के लिए बहुत जरूरी होते हैं। लेकिन शरीर में इन दोनों का बराबर  बराबर मात्रा में होना बहुत जरूरी होता है। जैसे कि अगर  शरीर में एक ओमेगा-3 एक हो तो उसके बदले एक ओमेगा-6  भी होना चाहिए। नहीं तो चार ओमेगा-6  के बदले कम से कम एक ओमेगा-3 तो शरीर में होना ही चाहिए।

लेकिन समस्या यह है कि हमारा खान-पान गलत तो होने की वजह से शरीर में omega-6 की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। जबकि  हमारे शरीर में लगभग पंद्रह ओमेगा-6 के बदले एक ओमेगा-3 होता है। गोश्त,चिकन,पनीर ,दूध,अंडा,तेल और सोया प्रोडक्ट में omega-6 की मात्रा ज्यादा होती है। जबकि अखरोट,अलसी के बीज,चिया सीड और कुछ खास तरह की मछलियों में ओमेगा-3 की मात्रा होती है। तो इसे देखकर तो आप खुद भी समझ सकते हैं कि आप इनमें से कौन सी चीजों का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। दोस्तों हम और आप में से ज्यादातर लोग ऐसी चीजों का ज्यादा सेवन करते जिसमें omega-6 की मात्रा पाई जाती है और जिसकी वजह से समय के साथ साथ जैसे-जैसे omega-6 की मात्रा शरीर में बढ़ती है। तो यह हमारे शरीर में इन्फ्लेमेशन और गर्मी पैदा करने लगता है। तभी से जोड़ों में दर्द चेहरे पर एक्ने पिंपल और ड्राई स्किन जैसी प्रॉब्लम शुरू होने लगती है। ओमेगा-3 गर्मी को शरीर से कम करने में बहुत मदद करता है।

ओमेगा-3 की कमी को किन-किन खाने की चीजों से पूरा पूरा किया जा सकता है और इसका कब और किस तरह से ओमेगा-3 का इस्तेमाल करना चाहिए

दोस्तों बेसिकली omega-3 तीन तरह का होता है। एक होता है ALA  दूसरा होता है EPA और तीसरा DHA होता है। ALA टाइप का ओमेगा-3 वेजीटेरियन भोजन में पाया जाता है। जैसे कि अखरोट,फ्लैक्सीड,अलसी के बीज,चिया सीड और  जैसी चीजें। जबकि  EPA और DHA टाइप का omega-3 नॉन वेजिटेरियन फूड में पाया जाता है। जैसे हैरिंग जैसी मछलियों में सबसे ज्यादा omega-3 की मात्रा होती है। लेकिन सवाल यह उठता है कि कैसे इन चीजों को अपने खाने में शामिल किया जाए।

अगर आप नॉनवेजिटेरियन है तो आप एक सप्ताह में दो से तीन बार रोस्टेड या फिर ग्रिल्ड मछली का   इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन जो लोग वेजिटेरियन हैं। उन्हें फ्लैक्सीड को रोस्ट करके या फिर उनका पाउडर बनाकर। एक से दो छोटा चम्मच किसी भी खाने के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा  चिया सीड  को पानी में भिगोकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें और उसके बाद इसे डायरेक्ट इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आप खाने की चीजों के जरिए ओमेगा-3 नहीं ले पाते हैं। तो ओमेगा-3 के सप्लीमेंट भी इस्तेमाल किया जा सकता है। जो कि fish oil  के नाम से मार्केट में या फिर ऑनलाइन आसानी से खरीदा जा सकता है।

फिश ऑयल सप्लीमेंट को इस्तेमाल करने से पहले बहुत सारी बातों का ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है। जैसे की फिश ऑयल कब कैसे और कितना इस्तेमाल करना चाहिए।  सबसे जरूरी है कि किस कंपनी का  फिश ऑयल सबसे ज्यादा बेहतर होता है। क्योंकि फिश ऑयल बनाने वाली जितनी भी कंपनी होती है। वह अपने प्रोडक्ट को वर्ल्ड बेस्ट फिश ऑयल सप्लीमेंट का खिताब दिया बैठे हैं।

किस खाने में सबसे ज्यादा omega-3 पाया जाता है

अब बात करते हैं कि शाकाहारी या फिर मांसाहारी किस खाने में सबसे ज्यादा omega-3 पाया जाता है। दोस्तों मछली और मछली के तेल में पाए जाने वाला ओमेगा-3  शरीर में जाने के बाद हमारे शरीर में  दिल,दिमाग,त्वचा,बाल और आंख की अच्छी सेहत के लिए हमारा शरीर सीधा इस्तमाल करता है। जबकि प्लांट बेस्ड  ओमेगा-3  हमारे शरीर में जाने के बाद हमारी बॉडी उसे सीधा इस्तमाल नहीं कर पाती। बल्कि पहले उसे EPA और DHA  में कन्वर्ट करती है। उसके बाद ही वह हमारे शरीर में काम में आता है। लेकिन यहां समस्या यह है कि इस प्रक्रिया में 8 से 10% ओमेगा-3 EPA और DHA  में कन्वर्ट हो पाता है।  बाकी का एनर्जी के रूप में इस्तेमाल कर लिया जाता है।इसलिए अगर इस हिसाब से देखा जाए तो मछली में पाए जाने वाला ओमेगा-3 ज्यादा बेहतर होता है।

 एक दिन में कितना omega-3 लेना चाहिए 

अब बात आती है एक दिन में कितना omega-3 लेना चाहिए और क्या इसके ज्यादा इस्तमाल करने से नुकसान भी हो सकते हैं। तो एक दिन में कितना ओमेगा-3 लेना चाहिए। यह  किसी भी व्यक्ति की फिजिकल एक्टिविटीज पर डिपेंड करता है। लेकिन एक सामान्य व्यक्ति को EPA और DHA दोनों मिलाकर एक  दिन में कम से कम पर 700 से 800 एमजी ओमेगा-3 लेना बहुत जरूरी होता है। अगर आप बहुत ज्यादा हार्डवर्क या फिर एक्सरसाइज करते हैं तो 1000 एमजी तक ओमेगा-3 की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। जिसमें लगभग 500 से 600 EPA  और 300 से 400 DHA  की मात्रा होनी चाहिए।

लेकिन एक बात का ख्याल रखें कि आपको EPA और DHA पर सिर्फ सप्लीमेंट का ही इस्तेमाल करते वक्त ध्यान देने की जरूरत है। अगर आप खाने की चीजों के जरिए ओमेगा-3 की को पूरा करते हैं। तो उसमें आपको EPA और DHA की टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। अब बताते हैं कि क्या ओमेगा-3 के ज्यादा इस्तेमाल से कोई नुकसान भी हो सकता है ?

Omega-3 के ज्यादा इस्तेमाल से कोई नुकसान भी हो सकता है 

दोस्तों वैसे तो खाने की चीजों के जरिए लिया गया ओमेगा-3 अक्सर हमारे शरीर में ओवरडोज नहीं होता। लेकिन जब सप्लीमेंट की बात आती है। तो ज्यादा ओमेगा-3 का इस्तेमाल करने से नुकसान भी हो सकते हैं। यूरोपियन फूड सेफ्टी अथॉरिटी के हिसाब से 5000 एमजी तक omega-3 सेफ्ली कंज्यूम किया जा सकता है। लेकिन मैं यह  पर यही कहना चाहूंगा की EPA और DHA  मिलाकर 1000mg से ज्यादा ओमेगा-3 का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती। अगर आप 1000mg से  ज्यादा ओमेगा-3 इस्तेमाल करना चाहते हैं। तो एक बार डॉक्टर की सलाह अवश्य  ले।

जबकि साथ ही साथ एक बात का और ख्याल रखें कि जिन लोगों को पहले से ही लो ब्लड प्रेशर की समस्या है। उन्हें डॉक्टर की सलाह लेकर ही ओमेगा-3 सप्लीमेंट का इस्तमाल करना चाहिए। लेकिन अगर आप 1000 एमजी से ज्यादा मात्रा में ओमेगा-3 का इस्तेमाल करना चाहता तो एक बार डॉक्टर की सलाह से ले क्योंकि शरीर में ओमेगा-3 की मात्रा ज्यादा होने पर लो ब्लड प्रेशर सांस लेने में दिक्कत और कहीं कट जाने पर खून न रुकने  जैसी समस्या शुरू हो सकती है। लेकिन ख्याल रखें कि ऐसा तब सिर्फ तब होता है। जब कोई व्यक्ति जरूरत से बहुत ज्यादा मात्रा मे omega -3  का सेवन करता है।

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शरीर में ओमेगा-3 की कमी होने से होने वाली बीमारियाँ 

बेसिकली ओमेगा-3 एक तरीके का फैट होता है। जिसकी कमी को खाने या सप्लीमेंट के जरिए आसानी से पूरा किया जा सकता है। लेकिन यहां समस्या यह है कि ज्यादातर लोगों को यही नहीं पता होता है कि ओमेगा-3 क्या होता है।  शरीर में ओमेगा-3 कमी होने से कौन-कौन से समस्या शुरू हो सकती है। वैसे ज्यादातर लोगों में ओमेगा-3 की कमी पाई जाती है और ऐसा इसलिए होता है।

क्योंकि हम जितना हम अपनी जुबान के  टेस्ट का ख्याल रखते हैं। उसका एक परसेंट भी सेहत का ख्याल नहीं रखते हैं। जिसकी वजह से पेट तो बढ़ जाता है। लेकिन शरीर में जरूरी न्यूट्रिएंट्स की कमी होने लगती है और धीरे धीरे शरीर कई तरह की बीमारियों का शिकार होने लगता है। इसलिए जरूरी होता है कि खाने को पहले बैलेंस किया जाए और जितना खाने में टेस्ट का ख्याल रखा जाता है। उतना ही न्यूट्रिएंट्स का भी ख्याल रखा जाए।  शरीर के लिए जरूर न्यूट्रिएंट्स में से  एक ओमेगा-3 फैटी एसिड भी होता है।

दरअसल ओमेगा-3 यह एक ऐसा फैट होता है। जिसमें तीन तरह के कॉम्पोनेंट पाए जाते हैं। ALA ,EPA  और DHA,समझने वाली बात यह है कि है ओमेगा-3 है एक ऐसा फैटी एसिड होता है। जिसे हमारा शरीर खुद नहीं बनाता है। इसकी वजह से ओमेगा-3 को बाहर कि खाने की चीजों से पूरा करना बहुत जरूरी होता है। ALA एक ऐसा फैटी एसिड है। जो वेजीटेरियन फूड में पाया जाता है। जैसे कि फ्लैक्सीड,चिया सीड और अखरोट जैसी चीजें जबकि EPA और DHA  टाइप का ओमेगा-3 नॉन वेजिटेरियन फूड में पाया जाता है।

जैसे कि मैं ग्रैसेलमैन,ट्यूना  और शेयरिंग जैसी मछली में सबसे ज्यादा ओमेगा-3 की मात्रा होती है। लेकिन समस्या यह है कि आज युग जिस तरह का खाना खाते हैं। उसमें ओमेगा 3 की मात्रा ना के बराबर ही पाई जाती है। जबकि एक सामान्य व्यक्ति को 500 एमजी से लेकर 700 एमजी तक का omega-3 लेना बहुत जरूरी होता है और जो लोग ज्यादा फिजिकल एक्टिविटीज करते हैं। उन्हें तो और भी ज्यादा मात्रा में ओमेगा-3 की जरूरत पड़ती है।

खाने में ओमेगा-3 की कमी होने की वजह से शरीर में भी धीरे-धीरे ओमेगा-3 की कमी होने लगती है और जिसकी वजह से धीरे-धीरे शरीर कई तरह की बीमारियों का शिकार पर होने लगता है। शरीर में ओमेगा-3 की कमी होने पर कई बार हमारा शरीर उसे अलग अलग तरीके से बताने की कोशिश करता है और जिस पर हम बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते हैं। इसलिए आज की इस पोस्ट में हम शरीर में ओमेगा-3  के कम होने के लक्षण के बारे में जानेंगे। जिन्हें आप को नजरअंदाज बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।

त्वचा की समस्या 

ओमेगा 3 फैटी एसिड सेलमेंब्रेन की अच्छी सेहत के लिए इस रिस्पांसिबल होता है। जो की त्वचा में बैरियर क्रिएट करता है। बेसिकली स्किन बैरियर्स त्वचा के ऊपरी स्तह पर होता है। जो कि शील्ड की तरह काम करता है। जैसे कि पोलूशन बैक्टीरिया और यूवी रेडिएशन से हमारी स्किन सेल को काफी हद तक प्रोटेक्ट करता है। इतना ही नहीं ओमेगा-3 स्किन के अंदर मौजूद टॉक्सिन को और जहरीले पदार्थ को बाहर निकालने में भी बहुत मदद करता है। लेकिन जब त्वचा में ओमेगा-3 की कमी होती है तो स्किन बैरियर यानी कि त्वचा की ऊपरी सतह कमजोर होकर डैमेज होने लगती है। जिसकी वजह से कई तरह की त्वचा की समस्या शुरू होने लगती है।

जैसे कि एग्जिमा,सोरायसिस और सूखी त्वचा। जब हमारे शरीर की त्वचा ओमेगा-3 की कमी की वजह से सूखती है। तो सिर में डैंड्रफ की समस्या हाथ पैर और चेहरे पर ड्राइनेस की समस्या रूप में साफ-साफ दिखाई पड़ने लगता है। त्वचा रूखी सुखी और बेजान दिखने के साथ-साथ कभी-कभी त्वचा की पतली पतली लेयर भी  छील छील कर बाहर निकलने लगती है। खासकर ओमेगा 3 की कमी से होने वाली स्किन ड्राइनेस में कितना भी मोटराइजर  लगा लिया जाए। वह तब तक ठीक नहीं होती जब तक कि ओमेगा-3 की कमी को शरीर में पूरा नहीं किया कर लिया जाए। इसलिए अगर सब कुछ करने के बावजूद भी आपकी त्वचा ड्राइनेस ठीक नहीं हो रही है। तो आपको एक बार ओमेगा-3 के बारे में जरूर सोचना चाहिए।

 मेमोरी लॉस या फिर मानसिक बीमारी 

दोस्तों ओमेगा-3 दिमाग के लिए बहुत जरूरी होता है। जिस तरह की कैल्शियम की कमी से हड्डियों की कमजोरी और खून की कमी से एनीमिया जैसी बीमारी होती है। उसी तरह ओमेगा-3 की कमी से दिमागी कमजोरी आने की मानसिक बीमारी होने के चांसेस बहुत ज्यादा रहते हैं। जैसे कि कोई भी बात को तुरंत भूल जाना। बहुत भूली हुई बात जल्दी याद ना आना। पढ़ाई या किसी काम पर ठीक से फोकस न कर पाना। डिप्रेशन सर दर्द और चक्कर आना। शरीर में ओमेगा-3 के संकेत हो सकते हैं।

क्योंकि ओमेगा-3 में पाए जाने वाला EPA  डिप्रेशन और एंजाइटी की से फाइट करता है। जबकि DHA दिमाग की प्रोसेसिंग और यादाश्त और पूरे दिमाग को ठीक तरह से काम करने के लिए बहुत जरूरी होता है। इसलिए अगर आप  भी लंबे समय से किसी दिमागी समस्या को परेशान हैं। तो पॉसिबल है कि यह शरीर में ओमेगा-3 की कमी की वजह से हो सकता  हैं। यहां तक कि एक स्टडी में यह भी पाया गया है कि प्रेगनेंसी के दौरान जो औरतें अपने खाने में ओमेगा-3 ठीक से नहीं ले पाती।  उनके पेट में पल रहे बच्चे का दिमाग भी ठीक तरह से विकसित नहीं हो पता है।  इसलिए हर किसी के लिए ओमेगा-3 का  एक सही मात्रा का लेना बहुत जरुरी होता है।

 हाई कोलेस्ट्रॉल या फिर दिल की बीमारी

दोस्तों आज हमारे देश में जितने लोगों की मौत होती है। उसमें से 24% ऐसे लोग होते हैं जिसकी हाई केलोस्ट्रोल या फिर दिल की बीमारी की वजह से मौत हो जाती है। जैसा कि आपको पता ही होगा कि हमारे शरीर में एचडीएल और अच्छा कैलिस्टो और एलडीएल यानी कि बुरा कोलेस्ट्रॉल दोनों ही होते हैं। लेकिन जब शरीर में ओमेगा-3 की कमी होती है। तो अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा धीरे-धीरे कम होने लगती है।

जबकि  बुरे कोलेस्ट्रॉल शरीर में बढ़ने लगते हैं। जिससे व्यक्ति हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारी का शिकार हो जाता है। क्योंकि दिन भर हम जिस तरीके का खाना खाते हैं। उसमें ऐसे फैट बहुत ज्यादा होते हैं। जो कि हमारे शरीर में बुरे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बहुत तेजी से बढ़ाते हैं। इसलिए ऐसे में जरूरी है कि कुछ omega-3 रिच फूड को भी अपने डाइट में शामिल किया जाए। ताकि बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम कर के अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को शरीर में बढ़ाया जा सके। शरीर में ओमेगा-3 की कमी होने से अनचाहे जगह पर चर्बी भी ज्यादा तेजी से जमने लगती है।

आंखों की कमजोरी

दोस्तों हमारी आंख का रेटिना लगभग 60% डी एच ए टाइप के ओमेगा-3 से बना होता है। इसलिए जब भी शरीर में ओमेगा-3 की कमी होती है। तो साथ ही साथ आंखों की कमजोरी और साफ ना देखने जैसी समस्या भी शुरू होने लगती है। अगर शरीर में सही मात्रा में ओमेगा-3 मौजूद होता है। तो यह आखों की रोशनी को इंप्रूव करता है। साथ ही साथ मैकुलर डिजनरेशन जैसी आंखों से जुड़ी खतरनाक बीमारी से भी काफी प्रोटेक्ट करता है।

इन्फ्लेमेशन शरीर में गर्मी का बढ़ना

जब शरीर में ओमेगा-3 की कमी होती है।  तो साथ ही साथ शरीर में इन्फ्लेमेशन यानी कि हीट और गर्मी भी बढ़ने लगती है।  जब शरीर में गर्मी बढ़ती  है तो कई तरह की इन्फ्लेमेटरी डिजीज होने के चांसेस बहुत ज्यादा हो जाते हैं।  एलर्जी ,चेहरे पर इस तरह की पिंपल्स होते हैं जो लाख कोशिश करने के बावजूद वह ठीक नहीं होते हो रही। तो यह शरीर में ओमेगा-3 की कमी के संकेत हो सकते हैं। क्योंकि omega-3 होने से शरीर में इन्फ्लेमेशन बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। जिससे कि  पिम्पल्स समय के साथ-साथ और भी ज्यादा तेजी से बढ़ने लगते हैं।

लेकिन वही जब शरीर में ओमेगा-3 की सही मात्रा मौजूद होती है। तो omega-3 में anti-inflammatory प्रॉपर्टीज होने की वजह से यह शरीर में इन्फ्लेमेशन को बढ़ने से रोकता है। जिससे कि पिम्पल की समस्या और सभी इन्फ्लेमेटरी डिजीज काफी हद तक कंट्रोल हो जाती है। हालांकि पिम्पल  की समस्या को ठीक करने के लिए ओमेगा-3 ही काफी नहीं है। बल्कि उसके लिए बहुत सारी बातों का ख्याल रखना चाहिए और जिसके बारे में हमने पहले से ही दो-तीन पोस्ट डाल रखी है। आप जिसके लिंक आपको इस पोस्ट के नीचे मिल जाएंगे। अगर आपको पिम्पल की समस्या है तो आप निचे दी गई पोस्ट को जरूर पढ़े। ये पोस्ट पिम्पल की समस्या से छुटकारा दिलाने में आपकी काफी मदद करेगी।

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इस पोस्ट में आपने अब तक omega-3  क्या होता है, omega-3 हमारे शरीर के लिए जरूरी क्यों है , omega-3  की कमी को किस-किस खाने के जरिए पूरा किया जा सकता है , किस खाने में सबसे ज्यादा ओमेगा-3 पाया जाता है , एक दिन में कितना omega-3 लेना चाहिए , omega-3 के ज्यादा इस्तमाल से कोई नुकसान हो सकता है क्या, शरीर में omega-3 की कमी से होने वाली बीमारियाँ हम उम्मीद करते है कि ये जानकारी आपको अच्छी लगी होगी। इस पोस्ट से आपने omega-3  से जुडी सभी बातो के बारे में  जाना।  इस जानकरी को शेयर करके ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुंचाने में हमारी मदद जरूर करे।


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