रावण और दशहरा से जुडी ये बाते नहीं जानते होंगे आप

नमस्कार दोस्तों, रावण का नाम सुनते ही हमारे मन में एक क्रूर राजा एक अहंकारी व्यक्ति और एक असुर और सब कुछ तुच्छ समझने वाले एक घमंडी इंसान की छवि उभरती है। लेकिन में से बहुत ही कम लोग जानते हैं कि रावण सर्वशक्तिशाली,एक कुशल राजा ,अत्यंत बुद्धिजीवी और अपने परिवार की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकने वाला एक भगवान शिव का एक असीम भक्त था। दोस्तों आज की इस पोस्ट में आप रावण के बारे में वह रोचक बातें भी जानेंगे।इस पोस्ट में मैं आपको रावण एक कुशल राजा था,रावण से जुड़े यह रहस्य नहीं जानते होंगे आप, रावण के बारे में अनसुनी रोचक बातें,रावण के जन्म की कहानी,दशहरा से जुडी रोचक बाते,रावण का शरीर आज भी सुरक्षित है , के बारे में बताऊंगा।

दोस्तों इस बात का रामायण में कहीं पर भी जिक्र नहीं है कि रावण के वध के बाद उसके शरीर का क्या किया गया। क्या रावण का शरीर आज भी श्रीलंका के जंगलों में किसी को शाम गुफा में सुरक्षित रखा गया है या या नहीं। क्या आपको पता है कि रावण बचपन से ही ना ही एक ब्राह्मण और ना ही एक राक्षस था वह ऋषि विश्रवा का पुत्र था। जो कि एक विद्वान ब्राह्मण थे।जबकि उनकी मां के किसी ऋषि विश्रवा की दूसरी पत्नी थी और वह राक्षस प्रजाति की थी। रावण की माँ क्षत्रिय राक्षसनी थी। जिनको ब्रह्मराक्षसनी के नाम से भी जाना जाता है। यही कारण था कि बचपन से ही रावण के पास राक्षस जैसी शक्ति और ब्राह्मण जैसी बुद्धि विद्यमान थी।

रावण एक कुशल राजा होने के साथ-साथ हर क्षेत्र में भी अव्वल था

रावण के समय में हवाई अड्डे और अत्याधुनिक विमान हुआ करते थे

हवाई अड्डे और अत्याधुनिक विमान हुआ करते थे। क्या आपको पता है कि रावण एक कुशल राजा होने के साथ-साथ हर क्षेत्र में भी अव्वल था। जिस समय भारत के राजा और बड़े-बड़े योद्धाओं को विमान के बारे में पता तक नहीं था। उस समय रावण के शासनकाल में चार चार हवाई अड्डे और अत्यधिक आधुनिक विमान हुआ करते थे। आज भी श्रीलंका में ऐसे हवाई अड्डे हैं। जिनको श्रीलंकाई सरकार के द्वारा कहा जाता है कि रावण ने इन्हें इस्तेमाल किया था।

रावण एक कुशल रक्षाविशेषज्ञ भी था

रावण सिर्फ तकनीकी क्षेत्र में भी एडवांस नहीं था बल्कि वह एक कुशल रक्षा विशेषज्ञ था और इसका प्रमाण हमें खुद रामायण में भी मिलता है। रावण ने श्रीलंका को चारों तरफ से ऐसे सुरक्षा घेरे से घेरे हुआ था कि जन साधारण तो छोड़िए हनुमान जैसे पुरुष को भी श्री लंका पहुंचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।

रावण को इतिहास का सबसे बुद्धिमान ब्राह्मण माना जाता है

रावण को इतिहास का सबसे बुद्धिमान ब्राह्मण माना जाता है। कहा जाता है कि रावण एक बार किसी भी चीज को पढ़ने के बाद हमेशा के लिए ही उसे याद रख सकता था। फिर वह चाहे जटिल संस्कृत के श्लोक हो या फिर प्राचीन पौराणिक ग्रंथ। यही कारण है कि रावण के द्वारा बहुत से बड़े-बड़े पौराणिक ग्रंथों की रचना भी की गई है.

बड़े-बड़े पौराणिक ग्रंथों की रचना रावण द्वारा ही की गई है

रावण के द्वारा बहुत से बड़े-बड़े पौराणिक ग्रंथों की रचना भी की गई है। जिसमें शिव तांडव स्त्रोतम जिसको शिव आराधना का एक अद्भुत हिस्सा माना जाता है। आपने कभी न कभी लाल किताब के बारे में जरूर सुना होगा। लाल किताब में कुंडली,हस्तरेखा और भी ज्योतिष से जुडी बाते है। आपको बता दे ज्योतिष का आधार इस लाल किताब की रचना भी रावण ने ही की थी।

रावण एक निडर व्यक्तित्व वाला एक कुशल राजा था

रावण एक निडर व्यक्तित्व वाला एक कुशल राजा था और उसकी कुशलता का प्रमाण खुद प्राचीन श्रीलंकन ग्रंथ देते हैं। आपको जानकर यह हैरानी होंगी कि श्रीलंका के पूरे ही इतिहास में सबसे कुशल और बुद्धिमान राजा रावण को ही माना जाता है। रावण के इसी काल में श्रीलंकन प्रजा सबसे ज्यादा समृद्ध और खुशहाल रही थी और सबसे बड़ा कारण यही है कि श्रीलंका के इस राजा को यहां की प्रजा भगवान स्वरूप पूजती है

क्या आपको पता है कि रावण कला में भी माहिर था

क्या आपको पता है कि रावण कला में भी माहिर था और इसका प्रमाण माता सरस्वती के हाथों में स्थित रूद्रवीणा है। जिसका निर्माण रावण ने अपने सिर,भुजा और धमनियो से ही किया था। रावण रूद्र वीणा बजाने में भी माहिर था। इसलिए भगवान शिव के अनुरोध पर रावण ने चारो वेदों को संगीतबद्ध किया था।

रावण को रावण का नाम भगवान शिव ने ही दिया था

पुरानी कथाओं में बताया जाता है कि एक बार रावण भगवान शिव को कैलाश से लंका ले जाना चाहता था। लेकिन शिवजी राजी नहीं हो रहे थे। तो उसने पर्वत को ही उठाने का प्रयास किया। जिसे देखकर शिव जी ने अपना पैर कैलाश पर्वत पर रख दिया। जिसकी वजह से रावण की उंगली दब गई। रावण उंगली दबने के बाद वहाँ तेज-तेज आवाज में शिव तांडव करने लगा। शिव जी यह देखकर बहुत ही आश्चर्य चकित रह गए कि एक व्यक्ति इतने दर्द में भी शिव तांडव कैसे कर सकता है और उसी क्षण शिव जी ने रावण को रावण का नाम दिया जिसका अर्थ होता है तेज तेज आवाज में दहाड़ना।

रावण सर्वशक्तिशाली भी था

रावण सर्वशक्तिशाली भी था। जिसका परिणाम हमें इस बात से लगता है कि रावण तीनों ही लोकों का स्वामी था। उसने न केवल इंदरलोक बल्कि भू लोंक के भी बड़े-बड़े हिस्सों को अपने असुरों की ताकत से कब्जा किया था। रावण सदैव ही एक वीर योद्धा की तरह अपनी सेना की अगुवाई किया करता था और बहुत से युद्ध तो उसने बिना सेना के अपने दम पर ही जीत लिए थे।

यमराज को भी रावण से हार का सामना करना पड़ा था

यहां तक कि रावण ने यमपुरी जाकर यमराज को युद्ध के लिए ललकारा और उन्हें हराया भी और नर्क में सजा पा रही जीव आत्माओं को आजाद करा कर अपनी सेना में भर्ती कर लिया।

शनि देव को रावण ने बनाया बंदी

माना यह जाता है कि जब के रावण पुत्र मेघनाथ का जन्म हुआ। तो रावण ने सभी ग्रहो को 11 वे स्थान पर रहने के लिए कहा ताकि उसके पुत्र को अमरता मिल सके। लेकिन शनि महाराज 11 वे स्थान की वजह 12वें स्थान पर जाकर विराज मान हो गए। रावण इस घटना से इतना क्रोधित हुआ कि उसने शनिदेव पर ही आक्रमण कर दिया। यह भी कहा जाता है कि कुछ समय तक उसने भगवान शनिदेव को भी अपना बंदी बना लिया था।

रावण एक आदर्श भाई और एक आदर्श पति भी था

रावण एक आदर्श भाई और एक आदर्श पति भी था। जहां उसने अपनी बहन सूर्पनखा के अपमान का बदला लेने के लिए वह कदम उठाया जो आगे चलकर उसके विनाश का कारण बना। वहीं दूसरी तरफ अपनी पत्नी को बचाने के लिए वह उस यज्ञ से उठ गया। जिस यज्ञ से. भगवान श्रीराम की पूरी ही सेना को तबाह कर सकता था इसके अलावा जब कुंभकरण को ब्रह्मा जी ने हमेशा नींद में सोने का वरदान दिया था। तब रावण ने दोबारा से तपस्या करके उसी अवधि को 6 महीने कराया था। जिससे पता चलता है कि रावण अपने भाई बहनों और पति पत्नी की कितनी फिक्र करता था।

भारत के कई हिस्सों में भी की जाती है रावण की पूजा

आपको जानकर यह हैरानी होंगी कि श्रीलंका के पूरे ही इतिहास में सबसे कुशल और बुद्धिमान राजा रावण को ही माना जाता है। रावण के इसी काल में श्रीलंकन प्रजा सबसे ज्यादा समृद्ध और खुशहाल रही थी और सबसे बड़ा कारण यही है कि श्रीलंका के इस राजा को यहां की प्रजा भगवान स्वरूप पूजती थी ।

आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन रावण की पूजा सिर्फ श्रीलंका में नहीं कही जाती है। बल्कि भारत में भी की जाती है। दक्षिण भारत व दक्षिण पूर्वी भारत के हिस्सों में रावण की पूजा की जाती है। कानपुर का कैलाश मंदिर साल में एक बार ही दशहरे के दिन ही खुलता है। जहां पर रावण की पूजा की जाती है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि आंध्र प्रदेश राजस्थान और भारत के कई हिस्सों में रावण की विधिवत पूजा की जाती है।

रावण का शरीर आज भी श्रीलंका के जंगलों में किसी को शाम गुफा में सुरक्षित है

दरअसल श्रीलंका के लोग अपने पूर्वजों से यह बातें सुनते हुए आए हैं कि रावण का शरीर आज भी श्रीलंका के जंगलों में किसी गुफा में रखा गया है। वहां के लोग मानते हैं कि रावण के वध के बाद नाग जाति के लोगों ने रावण को कई विधियों से जीवित करने का प्रयास किया था। लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। तो वह लोग रावण का शरीर उठाकर ले गए और उसके शरीर पर जड़ी बूटियों का लेप लगाकर एक ताबूत में सुरक्षित रखकर उस ताबूत को किसी को गुफा में छुपा दिया। उनको यह उम्मीद थी कि जब लक्ष्मण को संजीवनी बूटी से दोबारा जीवित किया जा सकता है। तो रावण को भी किया जा सकता है। यह कोई अंधविश्वास नहीं है बल्कि श्रीलंका की रिसर्च टीम भी मानती है कि रावण का शरीर आज भी श्रीलंका के घने जंगलों में एक ताबूत में रखा गया है। श्रीलंका में कोलंबो से 220 किलोमीटर एक जगह रंगला में इस ताबूत के होने का दावा किया गया है।

बाद में श्रीलंका सरकार की रिसर्च टीम ने कई बार उस गुफा तक पहुंचने की कोशिश की लेकिन हर बार वह असफल रहे। कई कोशिश के बाद फाइनली उनको जंगल में गुफा का नेटवर्क मिला और उन सभी गुफाओ में से एक गुफा में उनको 18 फीट लंबा और 5 फीट चौड़ा पत्थर का एक ताबूत भी मिला। जांच के बाद पाया गया कि उस पत्थर पर एक विशेष प्रकार का लेप लगा हुआ है। इस ताबूत को खोलने की इजाजत तो वहां की सरकार ने किसी को नहीं दी।

क्योंकि यह एक सुरक्षा का मामला था। दरअसल इस गुफा की बनावट ऐसी थी कि यहां का एक भी पत्थर अगर हिल जाता। तो बड़ा हादसा हो सकता है इसलिए इस ताबूत को आज तक बाहर निकालने और खोलने की इजाजत किसी को नहीं मिली। श्रीलंका के केंद्रीय मंत्री ने भी एक इंटरव्यू में इस बात को स्वीकार किया था। इस बात पर विश्वास करना थोड़ा मुश्किल है लेकिन जब एक सरकार ही ऐसे दावे करे तो वास्तव में यह बात सोचने पर मजबूर करती है।

रावण के जन्म की कहानी (रावण दुराचारी और अधर्मी गलत ग्रह नक्षत्रों में पैदा होने की वजह से था)

रामायण हिंदुओं का एक प्रमुख धर्म ग्रंथ है माना जाता है। वैसे तो रामायण में कई पात्र है। लेकिन लोग मुख्यतः प्रभु श्री राम से इसे जोड़कर देखते हैं। लेकिन दर्शकों यह भी सच है कि अगर रावण ना होता तो तो शायद रामायण की रचना ही ना होती। रावण को लोग काम,क्रोध और अधर्म और बुराई का प्रतीक मानते हैं। परंतु लोग यह भूल जाते हैं कि रावण में भले ही कई दुर्गुण थे। लेकिन वह एक विद्वान और ज्ञानी भी था। लेकिन गलत समय में जन्म लेने के कारण रावण ज्ञानी होते हुए भी राक्षस प्रवृत्ति का हो गया। दर्शकों आज मैं आपको इस पोस्ट में बताऊंगा कि आखिर रावण के जन्म के समय ऐसा क्या हुआ था कि वह अधर्मी हो गया था।

रावण लंका का राजा था। लंकापति रावण के जन्म के बारे में कई तरह की पौराणिक कथाओं का विवरण मिलता है। लेकिन वाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण ऋषि विश्रवा का पुत्र और पुलस्त्य मुनि का पोता था। कथा के अनुसार माल्यवान, सुमाली और माली के तीन दैत्य हुआ करते थे। इन तीनों ने बह्रमा जी  की घोर तपस्या की और बलशाली होने का वरदान प्राप्त किया। वरदान प्राप्ति के बाद यह तीनों भाई देवता और ऋषि-मुनियों पर अत्याचार करने लगे। यह देख सभी देवता भगवान शंकर के पास गए और प्राण बचाने को कहा भगवान शंकर ने यह कहते हुए मना कर दिया कि यह तीनों दैत्य मेरे हाथों में ही मारे जा सकते। इसलिए आप सभी श्री विष्णु जी के पास जाए।

भगवान शंकर के मुख से ऐसी बातें सुनकर सभी देवता गण भगवान शंकर को प्रणाम करते हुए भगवान विष्णु के पास चल दिए।  विष्णु जी के पास पहुंचकर सभी देवताओं ने राक्षसों के बारे में बताया और रक्षा करने की विनती भी की। देवताओं की बात सुनकर श्री हरि विष्णु ने आश्वासन देते हुए कहा कि आप सभी भयमुक्त होकर यहां से जाएं। देवताओं के जाने के बाद श्री विष्णु ने तीनों भाइयों को युद्ध के लिए ललकारा। तत्पश्चात भगवान विष्णु और तीनो भाई माल्यवान, सुमाली और माली के बीच भयंकर युद्ध हुआ युद्ध में माली मारा गया। जबकि माल्यवान, सुमाली डर कर पाताल लोक में छूप गए।

भाग गए कुछ समय बाद सोमाली पाताल लोक से बाहर निकलकर पृथ्वी पर भ्रमण करने के लिए आया लेकिन अंदर से वह डर रहा था कि कहीं कोई देवता उसे देख ना ले। इसी वजह से सुमाली कुछ समय बाद ही पाताल लोक चला गया। वापिस आकर सुमाली सोचने लगा कि ऐसा क्या उपाय किया जाए कि जिससे देवताओं पर विजय मिल सके। फिर सोमाली को लंका नरेश कुबेर का ध्यान आया। तब उसने सोचा कि क्यों ना वह अपनी पुत्री का  विवाह कुबेर के पिता जी  ऋषि विश्रवा से करवा दें। जिससे देवताओं जैसे तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति होगी।  यही बात उसने अपनी पुत्री कैकसी को जाकर बताइ।

कैकसी ने पिता की इच्छा को पूरा करना अपना धर्म समझा और विवाह के लिए स्वीकृति दे दी। पिता की आज्ञा पाते ही कैकसी ऋषि विश्रवा से मिलने वहां से निकल पड़ी।  लेकिन पाताल लोक से पृथ्वी में आने में उसे वक्त लग गया। जब वह ऋषि विश्रवा के पास पहुंची तब तक शाम हो चुकी थी। साथ ही साथ बादलों की गर्जना के साथ बारिश भी हो रही थी। कैकसी ने सबसे पहले ऋषि विश्रवा को प्रणाम किया और उसके बाद उसने उससे विवाह कर पुत्र प्राप्ति की इच्छा प्रकट की।

कैकसी की  बात सुनकर ऋषि विश्रवा ने कहा कि हे कन्या  मैं तुम्हारी यह इच्छा तो पूर्ण कर सकता हूं। लेकिन तुम बहुत ही गलत समय पे आई हो। ऐइसलिए तुम्हारे पुत्र राक्षसी प्रवृत्ति के होंगे। यह सुनकर कैकसी ने ऋषि विश्रवा के चरण पकड़ लिए और बोली कि है भ्रम वादी में ऐसे दुराचारी पुत्र को लेकर क्या करूंगी। मुझे तो आप जैसा तेजस्वी और ज्ञानी पुत्र चाहिए। कैकसी के बार-बार विनती करने पर ऋषि विश्रवा ने कहा चलो मैं तुम्हें एक और पुत्र दूंगा।  जो मेरी ही तरह धर्मात्मा होगा। इस तरह कुछ समय बाद कैक्सी ने तीन पुत्र रावण,कुंभकर्ण और विभीषण को जन्म दिया।

तो अब तो आप समझ ही गए होंगे कि ज्ञानी होते हुए भी रावण दुराचारी और अधर्मी गलत ग्रह नक्षत्रों में पैदा होने की वजह से था

दशहरा से जुडी ये रोचक बाते नहीं जानते होंगे आप

भगवान राम ने रावण का वध किया था। इसलिए दशहरा का त्यौहार मनाया जाता है। लेकिन यह वह तथ्य है जिसे हम सब जानते हैं। तो चलिए आज दशहरा के बारे में हम आपको कुछ ऐसे तथ्य बता रहे हैं। जिसे शायद ही आप जानते हो। दशहरा संस्कृत शब्द दशा और हारा से बना है। जिसका सीधा अर्थ होता है सूर्य की हार। कहा जाता है कि अगर रावण का वध भगवान राम ने ना किया होता तो सूर्य हमेशा के लिए अस्त हो जाता। दशहरे को विजय दशमी भी कहा जाता है।

इसका महत्व इस रूप में भी होता है कि मां दुर्गा ने दसवें दिन महिषासुर राक्षस को मारा था।  महिषासुर राक्षस राक्षसों का राजा था। जो लोगों पर अत्याचार करता था। उसके अत्याचारों को देखकर भगवान ब्रह्मा,विष्ष्णु और महेश ने शक्ति का निर्माण किया। महिषासुर और शक्ति के बीच 10 दिनों तक युद्ध हुआ और और दसवे दिन माँ दुर्गा ने विजय हासिल कर ली।   ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि में मां अपने मायके आती है।फिर  दसवें दिन उनकी विदाई होती है। यही वजह है कि लोग नवरात्रि के दसवें दिन उन्हें पानी में विसर्जित करते हैं।

एक मान्यता यह भी है कि श्री राम ने रावण के दसों सिर का वध किया था। जिससे  अंदर की 10 बुराइयों को खत्म करने से जोड़कर देखा जाता है। पाप,काम,क्रोध,मोह,लोभ,घमंड,स्वार्थ,जलन,अहंकार,अमानवता और अन्याय  10 बुराइयां हैं।

ऐसा भी कहा जाता है कि पहली बार दशहरा मैसूर राजा के राज में 17 वीं शताब्दी में मनाया था। यह त्यौहार सिर्फ भारत ही नहीं बांग्लादेश और नेपाल में भी मनाई जाती है। मलेशिया में दशहरा पर राष्ट्रीय अवकाश होता है। दशहरा त्योहार को मौसम बदलने से जोड़कर भी देखा जाता है। दशहरा से सर्दियों की शुरुआत होती है। यह खरीफ की खेती का मौसम भी होता है। खरीफ की कटाई होती है और दिवाली के बाद रबी की बुवाई शुरू होती है। दशहरा भगवान राम और माता दुर्गा दोनों केमहत्व को दर्शाता है।

रावण को हराने के लिए श्री राम ने मां दुर्गा की पूजा की थी और आशीर्वाद के रूप में माँ  ने रावण को मारने का रहस्य बताया था। एक और मान्यता यह है कि दशहरा के दिन ही राजा अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया था। इसी दिन भारत का संविधान लिखने वाले डॉक्टर अंबेडकर ने भी बौद्ध धर्म अपनाया था। तो दशहरा से जुड़ी यह वह तथ्य है जिसके बारे में शायद ही आपको पहले पता हो। उम्मीद है आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी।से जुडी ये रोचक बाते नहीं जानते होंगे आप

रावण से जुड़े यह रहस्य नहीं जानते होंगे आप (रावण के बारे में अनसुनी रोचक बातें)

रावण यह नाम सुनते ही लोगों के दिल में जो पहला विचार आता है। वह है सीता हरण। यह एक ऐसी पौराणिक घटना है जिसने एक महाविद्वान और प्रखंड पंडित को एक खलनायक बना दिया। लोग रावण को सीता हरण के लिए याद रखते हैं।  लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि रावण के बारे में जो बताया गया है या बताया जा रहा है। वह पूरा सच नहीं है।

रावण एक कुशल सेनापति,राजनीतिक,ज्योतिष,वास्तु कला और बहुत सी कलाओं के ज्ञाता था। वह इंद्रजाल,सम्मोहन जैसे तंत्र-मन्त्र  के साथ भी बहुत तरह के जादू जानता था। इसलिए उसे मायावी भी कहा जाता था। इन्हीं विधियों की वजह से लोग  उससे भयभीत रहते थे। रावण में जितनी बुराइयां थी। उसने उतनी ही अच्छाई भी थी। यही वजह है कि इतनी बुराइयां होने के बाद भी उसके शत्रु तक उसका सम्मान करते थे।

दोस्तों आज हम ऐसी अद्भुत व्यक्ति जो कि एक बहुत खल बड़े खलनायक के रूप में जाना जाता है के बारे में कुछ रोचक बातें आपके साथ शेयर करेंगे। आज हम रावण के बारे में वो रोचक बाते बताएंगे। जो कि बहुत कम लोग या ना के बराबर ही लोग ही जानते हैं।

रावण वीर और अद्भुत योद्धा था

इसमें कोई संदेह नहीं है कि रावण एक वीर योद्धा था। उसकी वीरता की व्याख्या बहुत से पुराण और कथाओं में सुनने को मिलती है। रावण जब भी युद्ध के लिए निकलता था। तब वह अपनी सेना के अगुआई वे खुद सेनापति के बहुत आगे रह कर करता था। बहुत से युद्ध तो उसने अकेले ही जीत लिए थे।

रावण ने यमराज को युद्ध में पराजित किया था  

एक बार उसने यमपुरी जाकर यमराज को युद्ध के लिए ललकारा और उन्हें युद्ध में  हराकर। नर्क में सजा प्राप्त कर रही जीव आत्माओं को वहां से मुक्त करा कर अपनी सेना में शामिल कर लिया। दोस्तों आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इतना वीर और अद्भुत योद्धा होते हुए भी। रावण को कई बार पराजय का सामना करना पड़ा था।

भगवान श्री राम के के अलावा इन सभी योद्धाओ ने भी रावण को पराजित किया था 

बाली के हाथों भी रावण को पराजित और लज्जित होना पड़ा था

भगवान श्री राम ने रावण को हराया था यह तो हर कोई जानता है पर बहुत ही कम लोग हैं जो यह जानते हैं। वानर राज सुग्रीव के भाई बाली के हाथों भी रावण को पराजित और लज्जित होना पड़ा था। बाली बहुत ही शक्तिशाली शक्तिशाली था। वह हर रोज चारों समुंदर की परिक्रमा करके सूर्य को जल अर्पण करता था। एक दिन रावण की ललकार  पर क्रोधित होकर उसने रावण को अपनी बाजू में दबाकर चारों समुंदर की परिक्रमा करके सूर्य को जल अर्पण किया था। इसके बाद उन दोनों में मित्रता हो गई थी। 

अर्जुन ने रावण को पकड़कर अपना बंदी बना लिया था


इसी प्रकार से सहस्त्रबाहु अर्जुन ने रावण को पकड़कर अपना बंदी बना लिया था। पौराणिक कथाओं की मानें तो सहस्त्रबाहु अर्जुन बहुत बलशाली था। उसके हजारों हाथ थे। उसने अपने हजारों हाथों से एक बार नर्मदा नदी के जल प्रवाह को रोक दिया था। उस इकट्ठा हुए जल में उसने रावण को उसकी सेना सहित बहा दिया था।

भगवान शिव से युद्ध में हारने के बाद रावण ने उनको अपना गुरु बना लिया

एक बार रावण ने भगवन शिव से युद्ध किया किया।इसी तरह भगवान शिव से युद्ध में हारने के बाद रावण ने उनको अपना गुरु बना लिया था।

रावण के विमान और हवाई अड्डे 


 चलिए बात करते हैं रावण के विमान और हवाई अड्डों की यह तो सभी जानते हैं कि रावण ने कुबेर को हराकर लंका पर अपना राज्य कायम किया था। रावण ने लंका के साथ धनपति कुबेर से उसका अद्भुत विमान जिसे पुष्पक के नाम से जाना जाता है भी छीन लिया था। पुष्पक विमान की निर्माण विधि और उसका रूप ब्रह्मऋषि अंगिरा ने बताई थी।  भगवान विश्वकर्मा ने इस अद्भुत विमान का निर्माण किया था। यही वह अद्भुत रचना थी जिस  ने उन्हें देव शिल्पी की उपाधि दिलाई।

पुष्पक विमान

पुष्पक अपने आप में एक बहुत ही अद्भुत विमान माना जाता है। जो की इच्छा अनुसार गति पर चलता था। इसकी बहुत सी विशेषताओं में से एक यह थी इसे इच्छा अनुसार बड़ा या छोटा किया जा सकता था। इसमें बहुत सारे लोग एक साथ यात्रा कर सकते थे। मन की गति से चलने की क्षमता के कारण इस विमान का स्वामी अपनी इच्छा  के अनुसार कहीं भी आ जा सकता था। रावण से जुड़ी चीजों पर बहुत से बहुत सारी एजेंसीज भारत और श्रीलंका में रिसर्च कर रही है। इसी के अंतर्गत श्रीलंका की श्री रामायण रिसर्च कमेटी की रिसर्च के अनुसार रावण के पास चार हवाई अड्डे थे। कमेटी की रिसर्च के अनुसार हनुमान ने लंका दहन के समय उन्हें नष्ट कर दिया था।

रावण द्वारा की गई रचनाएं 

रावण द्वारा बहुत सी रचनाएं की गई थी। जिसमें शिव तांडव स्त्रोतम जिसे सुनकर लोगों को एक अद्भुत शांति मिलती है। जिसको शिव आराधना का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।  इसकी रचना रावण नहीं की थी। लाल किताब को  को मूल रूप से अरुण सहिता के नाम से जाना जाता है। इसे कई भाषाओं में अनुवादित भी किया गया है। मान्यता है कि रावण को यह ज्ञान सूर्य देव के साथ ही अरुण से प्राप्त हुआ था।

जिसमें हस्तरेखा,जन्मकुंडली,सामुद्रिक शास्त्र का विस्तृत संयोजन किया गया है। अरुण सहिता को ज्योतिष का एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्त्रोत माना जाता है। यह रावण के संपूर्ण जीवन का सार है। यह किताब ज्योतिष से जुड़ी जानकारियों का भंडार है।

रावण एक बहुत बड़ा कला प्रेमी भी था

रावण एक बहुत बड़ा कला प्रेमी भी था। इसका उदाहरण माता सरस्वती के हाथों में स्थित रूद्रवीणा है। जिसका निर्माण रावण ने अपने सर भुजा और धमनियों से किया था। रावण रूद्रवीणा बजाने में भी माहिर था। इसी वजह से भगवान शिव के   अनुरोध पर रावण ने चारों वेदों को संगीतबद्ध भी किया था।

कई लोगों की धारणा है कि रावण बहुत ही अहंकारी था। पर यह पूर्णता सत्य नहीं है। आपको यह जानकर बहुत हैरानी होगी कि रावण एक विनम्र व्यक्ति भी था। इसके कई उदाहरण बहुत सी पौराणिक कथाओं में भी मिल जाते हैं। कहा जाता है कि जब प्रभु श्री राम रामेश्वरम शिवलिंग की स्थापना कर रहे थे। तब उन्हें कोई विद्वान पंडित नहीं मिल रहा था। तो उन्होंने रावण को पूजा कराने का आमंत्रण दिया। एक ब्राह्मण और शिव भक्त होने के नाते रावण ने ना उनका आमंत्रण स्वीकार किया और बल्कि श्री राम की विजय की कामना भी की।

ऐसी ही एक और मान्यता है कि जब मेघनाथ के हाथों शक्ति लगने से लक्ष्मण घायल हो गए थे और उनके उपचार के लिए आयुर्वेदाचार्य द्वारा अनुमति मांगने पर रावण ने उन्हें शस्त्र अनुमति दे दी थी। परंतु इस घटना के समर्थन में कोई भी प्रमाण ना होने की वजह से लोग इसे एक मिथक मानते हैं। यही वजह है कि रावण द्वारा सीता को कभी ना स्पर्श करने के पीछे रावण को मिले सब श्राप को कारण माना जाता है। ना कि उसके विनम्र व्यक्तित्व को।

लोग रावण को बस एक खलनायक के रूप में जानते हैं। क्योंकि बहुत ही कथाओं और आजकल चल रहे पौराणिक धारावाहिकों में भी रावण को एक खलनायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पर यह पूरा सत्य नहीं है। वह जितना बुरा था उतना ही ज्ञानी और विनम्र भी था। दोस्तों आप रावण के बारे में क्या सोचते हैं हमें कमेंट में जरूर बताइए।

इस पोस्ट में अब तक आपने रावण एक कुशल राजा था,रावण से जुड़े यह रहस्य नहीं जानते होंगे आप, रावण के बारे में अनसुनी रोचक बातें,रावण के जन्म की कहानी,दशहरा से जुडी रोचक बाते,रावण का शरीर आज भी सुरक्षित है , के बारे जानकारी प्राप्त की।रावण जितना बुरा था उतना ही ज्ञानी और विनम्र भी था। दोस्तों आप रावण के बारे में क्या सोचते हैं हमें कमेंट में जरूर बताइए।

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